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पितृ गायत्री मंत्र जप

पितृ गायत्री मंत्र जप

पितृ गायत्री मंत्र जप, सम्पूर्ण विधि सहित


पितृ दोष को शान्त करने के लिए और पितरों का आर्शिवाद प्राप्त करने के लिए पितृ गायत्री मंत्र सबसे श्रेष्ठ है। पितृ पक्ष में इस मंत्र का जाप करने से रुष्ट पितृ तृप्त होकर अपनी कृपा मंत्र जाप करने वाले के ऊपर जरुर करते है।


मन्त्र:-  ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः ।।


- इस मन्त्र का जाप पितृ पक्ष और अमावस्या के दिन करने से तत्काल पितृ शान्ति होती है।

- इस मन्त्र का जाप करते समय भगवान श्री हरि के चरणों का ध्यान करना चाहिए।

- नारायण आपके पितरों को परमशान्ति दें, पितृ पक्ष आप सभी के लिए शुभ रहें। 

- पितृ पक्ष में पितृ गायत्री मन्त्र की कम से कम 11 माला का जप प्रतिदिन सूर्योदय के समय करना चाहिए।

- विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी प्रतिदिन करना अधिक शुभ होता है।

- जिन लोगों की जन्मकुण्डली में पितृ दोष है उन्हें पितृ गायत्री का अनुष्ठान अवश्य करवाना चाहिए।


---:ध्यान देने योग्य बातें:---


1. पात्रापात्रका विचार न करना केवल अतिथि के लिए वैश्वदेवके लिए हैं। अन्यत्र पात्रापात्रका विचार बहुत ही अपेक्षित है। दान तो खूब विचारकर सत्पात्रको ही देना चाहिए। यदि बिना विचारे किसी अपात्रको खिला दिया जाय तो वह जो कुछ पाप करेगा, उसका हिस्सेदार खिलानेवाला भी होगा और खोजकर यदि भगवतप्राप्त संतको भोजन करा दिया जाय तो अन्नदाताको लाखों ब्राह्मणोंको भोजन करने का फल प्राप्त हो जाएगा। साथ ही दया-परवश होकर दीनदुखियोंको यदि कुछ दिया जाता है तो वह भी लाभप्रद होता है। लूले-लंगड़े आदिका भी भरण-पोषण किया जाना चाहिए, किन्तु उन्हे दान न दे । 

2. वैश्वदेव नित्यकर्म है। इसके करने से प्रत्यवायके शमन के साथ-साथ फल की भी प्राप्ति होती है, किन्तु अशौचमें इसे न करे। 

3. नित्यकर्ममें नित्य-श्राद्ध भी आता है।


।। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।।