जानिए कुण्डली मिलान की सम्पूर्ण जानकारी

कुण्डली मिलान
विवाह से पूर्व कुण्डली मिलान करते समय आपने लोगों का यह कथन तो सुना ही होगा कि “शादी दो गुड्डे-गुड़ियों का खेल नहीं है”। मानव जीवन में शादी एक बार ही होती है, इसीलिए लोग चाहते हैं कि उनकी ज़िन्दगी में जो भी जीवनसाथी आए वह सर्वगुण संपन्न हो। विवाह दो लोगों के बीच एक संबंध होता है जो आने वाले जन्मों तक उन्हें एक दूसरे के साथ जोड़कर रखता है। शादी चाहे Love हो या Arrange हो, कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जिनके पूर्ण होने के बाद ही शादी-विवाह का आयोजन किया जाता है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण होता है कुण्डली मिलान। हमारे पूर्वजों का कहना है कि शादीशुदा ज़िन्दगी खुशहाल रहे इसके लिए विवाह से पूर्व कुण्डली मिलान करवाना अधिक आवश्यक है।
क्या है कुण्डली मिलान?
कुण्डली मिलान का इतिहास लाखों वर्षों पुराना है । हमारी हिन्दू संस्कृति में शादी का बहुत अधिक महत्व है। आध्यात्मिक ग्रंथों के अनुसार कुण्डली मिलान सुख, संपन्नता से परिपूर्ण शादीशुदा जीवन का एक मार्ग बताया गया है। कुण्डली मिलान होने वाले दूल्हा-दुल्हन की अनुकूलता और उनके सुखी-समृद्ध भविष्य को जानने का एक तरीका है। किसी भी व्यक्ति के विवाह के लिए कुण्डली मिलान बेहद आवश्यक है। यह एक प्रारंभिक कदम है जो वर-वधु के परिवार जनों द्वारा उठाया जाता है। कुछ लोगों कि यह मान्यता है कि कुण्डली मिलान के बिना एक अच्छे जीवन साथी की तलाश पूरी नहीं होती।
कुण्डली मिलान विवाह के बंधन में बंधने वाले दो अलग-अलग लोगों की आध्यात्मिक, शारीरिक और भावनात्मक अनुकूलता के बारे में जानकारी देता है। कुण्डली मिलान से आप रिश्ते की स्थिरता की जानकारी गहराई से प्राप्त कर सकते हैं।
कुण्डली मिलान में गुण मिलान का वास्तविक अर्थ
कुण्डली मिलान में सबसे पहला कार्य गुण मिलाना होता है। किसी भी व्यक्ति की कुण्डली में आठ तरह के गुणों और अष्टकूटों का मिलान किया जाता है। शादी में गुण मिलाना आवश्यक होता है। जैसे:- वर्ण, वश्य, तारा, योनि, गृह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी आदि । इन सब के मिलान का कुल अंक 36 होता है। कुण्डली मिलान के समय यदि वर-वधु की कुण्डली में 36 में से 18 गुण मिल रहे हैं तो इसका अर्थ है कि शादी बिना कोई विघ्न सम्पन्न हो सकती है। ये 18 गुण स्वास्थ, दोष, गण, सन्तान आदि से सम्बंधित होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शादी के लिए कितने गुण मिलना शुभ होता है और कितने अशुभ -
18 या इससे कम गुण मिलने पर
| ज्योतिष की गणना के अनुसार 18 या इससे कम गुण मिलने पर ज्यादातर विवाह के पश्चात दुखद जीवन-यापन की संभावना होती है।
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18-24 गुण मिलने पर
| गुण मिलान में 18 से 24 गुण मिलने पर विवाह सफल तो होगी लेकिन इसमें थोड़ी बहुत समस्याएँ आने की संभावना होती है।
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24-32 गुण मिलने पर
| गुण मिलान में 24 से 32 गुण मिलने पर वैवाहिक जीवन सुखद पूर्वक सम्पन्न होता है।
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32 से 36 गुण मिलने पर
| ज्योतिष के अनुसार इस तरह का विवाह बहुत ही शुभ माने जाते हैं एवं इनके वैवाहिक जीवन में बिलकुल भी समस्याएं उत्पन्न नहीं होती।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह के लिए 36 में से 18 गुणों का मिलना आवश्यक है।
विवाह के लिए कुण्डली मिलान क्यों जरूरी है ?
हमारे समाज में हर तरह के लोग होते हैं कुछ ऐसे भी लोग हैं जो आधुनिक होने के साथ-साथ पीढ़ियों से चली आ रही परम्पराओं का पालन करते हैं। हम सब यह जानते हैं कि ज्योतिष शास्त्र भी एक विज्ञान है। यह हमारी कुण्डली में मौजूद ग्रहों, गुणों आदि की मदद से यह बताता है कि हमारा आने वाला भविष्य कैसा रहेगा ?
विवाह में कुण्डली मिलान एक प्रकार गणना है जो हमें यह बताने में सहायक है कि वर-वधू के नक्षत्र और ग्रह आदि एक दूसरे के लिए अनुकूल हैं या प्रतिकूल। यदि लड़का और लड़की दोनों के नक्षत्र और गुण अनुकूल हैं तो उनका वैवाहिक जीवन सुखमय और खुशहाल रहता है, लेकिन वहीँ अगर दोनों के नक्षत्र प्रतिकूल होते हैं तो उनका वैवाहिक जीवन दुखदाई रहता है। कुछ लोगों का मानना है कि यदि विवाह के लिए कुण्डली मिलान से ज्यादा आवश्यकता एक दूसरे के प्रति प्रेम, आपसी समझ और विश्वास की होती है।
जन्म कुण्डली का मिलान नाम से क्यों किया जाता है?
जन्म पत्रिका मिलान को नाम से या जन्म तिथि से, दोनों तरीकों से किया जा सकता है, अगर अभी का नाम जन्म नाम पर ही रखा गया है तो राशि और नक्षत्र एक समान ही होंगे, इस दशा में गुण मिलान दोनों में एक समान ही होगा. केवल नाम से कुण्डली मिलान उनके लिए उपयोगी हैं, जिनके पास जन्म तारीख और समय उपलब्ध नहीं है.